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जयपुर बाल महोत्सव में राजस्थान के विभिन्न जिलों से आए बच्चों ने अपनी रचनात्मक प्रस्तुतियों के जरिए अपने-अपने जिले की खास पहचान को सामने रखा।

धौलपुर जिले का प्रतिनिधित्व कर रहे प्रतिभागियों ने अपनी स्टॉल के माध्यम से जिले के पारंपरिक खान-पान, जैसे मूंग दाल का हलवा और दही-जलेबी, को आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया। साथ ही, पर्यटन स्थलों के मॉडल के जरिए जिले की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराया तथा यहां होने वाली प्रमुख फसलों और कृषि […]

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Union Tourism Minister Gajendra Singh Shekhawat will interact with children at the “Jodhpur Children’s Festival.”

December will witness a magnificent confluence of the state’s tourism, art, culture, and heritage conservation. Children and youth aged 12 to 18 can participate by sharing something special about their district and winning exciting prizes.

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जयपुर बाल महोत्सव में राजस्थान के विभिन्न जिलों से आए बच्चों ने अपनी रचनात्मक प्रस्तुतियों के जरिए अपने-अपने जिले की खास पहचान को सामने रखा।

करौली जिले का प्रतिनिधित्व कर रहे प्रतिभागियों ने अपनी स्टॉल के माध्यम से जिले की प्रमुख विशेषताओं को आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया। उन्होंने प्रमुख पर्यटन स्थलों के मॉडल बनाकर करौली की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत की झलक दिखाई, साथ ही जिले के पारंपरिक खान-पान से भी सभी को परिचित कराया।

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जयपुर बाल महोत्सव में राजस्थान के विभिन्न जिलों से आए बच्चों ने अपनी रचनात्मक प्रस्तुतियों के जरिए अपने-अपने जिले की खास पहचान को सामने रखा।

फलोदी जिले का प्रतिनिधित्व कर रहे प्रतिभागियों ने अपनी स्टॉल के माध्यम से जिले की प्रमुख विशेषताओं को प्रदर्शित किया। साथ ही, उन्होंने फलोदी को ‘सॉल्ट सिटी’ क्यों कहा जाता है, इसके पीछे की वजह और क्षेत्र की विशेषताओं से भी सभी को परिचित कराया।

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जयपुर बाल महोत्सव में राजस्थान के विभिन्न जिलों से आए बच्चों ने अपनी रचनात्मक प्रस्तुतियों के जरिए अपने-अपने जिले की खास पहचान को सामने रखा।

उदयपुर जिले का प्रतिनिधित्व कर रहे प्रतिभागियों ने अपनी स्टॉल के माध्यम से मिनिएचर पेंटिंग, पारंपरिक हस्तशिल्प और चाँदी के आभूषणों को प्रदर्शित किया। साथ ही, उदयपुर के शाही खान-पान और ‘झीलों की नगरी’ के रूप में प्रसिद्ध शहर की ऐतिहासिक विरासत को आकर्षक मॉडलों के जरिए प्रस्तुत किया।

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जयपुर बाल महोत्सव में राजस्थान के विभिन्न जिलों से आए बच्चों ने अपनी रचनात्मक प्रस्तुतियों के जरिए अपने-अपने जिले की खास पहचान को सामने रखा।

अजमेर जिले का प्रतिनिधित्व कर रहे प्रतिभागियों ने अपनी स्टॉल पर प्रसिद्ध सोहन हलवा सहित पारंपरिक खान-पान को प्रदर्शित किया। साथ ही, आकर्षक मॉडलों के माध्यम से अजमेर के प्रमुख पर्यटन स्थलों की झलक प्रस्तुत कर जिले की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत से दर्शकों को परिचित कराया।

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केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने किया ‘जोधपुर बाल महोत्सव’ के पोस्टर का विमोचन, बोले—नई पीढ़ी को जड़ों से जोड़ने का बेहतरीन नवाचार

जोधपुर। दिसंबर माह में जोधपुर में तीन दिवसीय ‘जोधपुर बाल महोत्सव’ आयोजित होने जा रहा है। डिजिटल बाल मेला और फ्यूचर सोसाइटी द्वारा आयोजित और कॉग्निवेरा द्वारा प्रायोजित प्रस्तावित इस महोत्सव में राजस्थान के सभी 41 जिलों के बच्चे शामिल होंगे। महोत्सव के माध्यम से बच्चे अपने-अपने जिले की संस्कृति, परंपरा, पर्यटन, हस्तशिल्प, लोक कला,

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जयपुर बाल महोत्सव में राजस्थान के विभिन्न जिलों से आए बच्चों ने अपनी रचनात्मक प्रस्तुतियों से अपने-अपने जिले की खास पहचान को जीवंत किया।

झुंझुनूं जिले का प्रतिनिधित्व कर रही खनक अग्रवाल ने अपनी स्टॉल पर जिले के प्रमुख पर्यटन स्थलों के मॉडल और स्थानीय पारंपरिक खान-पान को प्रदर्शित कर झुंझुनूं की संस्कृति और विरासत की सुंदर झलक प्रस्तुत की। उनकी प्रस्तुति ने दर्शकों को जिले की ऐतिहासिक पहचान और स्थानीय स्वाद से रूबरू कराया।

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जयपुर बाल महोत्सव में राजस्थान के विभिन्न जिलों से आए बच्चों ने अपनी प्रस्तुतियों के जरिए अपने-अपने जिले की खास पहचान को सामने रखा।

डीग जिले का प्रतिनिधित्व कर रही प्रसिद्धि कोली ने अपनी स्टॉल के माध्यम से जिले की स्थानीय संस्कृति और पारंपरिक खान-पान की विशेषताओं को आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया। उनकी प्रस्तुति ने दर्शकों को डीग की क्षेत्रीय पहचान और स्वाद से परिचित कराया।

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जयपुर बाल महोत्सव में राजस्थान के विभिन्न जिलों से आए बच्चों ने अपनी रचनात्मक प्रस्तुतियों के जरिए अपने-अपने जिले की खास पहचान को सामने रखा।

बाड़मेर जिले का प्रतिनिधित्व कर रही पावनी चौधरी ने अपनी स्टॉल में केर-सांगरी और उससे बनने वाले पारंपरिक अचार के साथ बाड़मेर की प्रसिद्ध अजरख ब्लॉक प्रिंटिंग और वूल क्राफ्टिंग को मॉडलों के माध्यम से प्रदर्शित किया। उन्होंने इन स्थानीय कलाओं और उत्पादों की विशेषताओं की जानकारी भी साझा की। पावनी की सृजनात्मक प्रस्तुति और

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